बिहार की बेटी ने रचा_इतिहास

कहते हैं कि दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो, तो तमाम बाधाओं के बावजूद इंसान अपनी मंजिल को प्राप्त कर ही लेता है. इस कहावत को वास्तविकता के धरातल पर उतारा है बिहार की बेटी निशु सिंह ने. जमुई की निशु ने एशिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी को फतह कर आसमान छू लिया है। उसके हौसले बुलंद हैं और वह माउंट एवरेस्ट की चोटी पर फतह करने की तैयारी में जुटी है। जमुई के छोटे से गांव टेंडहारा की इस बेटी ने एशिया के सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहरा कर देश को गौरवान्वित किया है। निशु सिंह मध्यम वर्गीय परिवार से है. उसके पिता केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में जवान थे, जो रिटायर होने के बाद एक बैंक में गार्ड की नौकरी करते हैं। बिहार के जिस छोटे से जिले की पहचान अभी भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र से होती है। वहां के एक छोटे से गांव और मिडिल क्लास परिवार में जन्मी बेटी निशु पर्वतारोही के रूप में अपनी पहचान बना रही है। लद्दाख में स्थित एशिया के सबसे ऊंचे ट्रैकिंग पीक पर तिरंगा फहराकर अपनी पहचान बनाने वाली इस बेटी का चयन अब अफ्रीका और यूरोप के पर्वत पर चढ़ने के लिए हुआ है। निशु सिंह का सपना तो हालांकि विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करना है, पर पैसे की कमी अब उसके इस हौसले के बीच मे आ रही है।
जमुई जिले के बरहट थाना इलाके के टेंगहरा निवासी रिटायर सीआरपीएफ जवान विपिन सिंह की दो बेटियों में छोटी बेटी निशु सिंह है। पर्वतारोहण के क्रम में उसने अपनी शुरुआत हिमाचल प्रदेश के सलोन में अवस्थित 7500 फीट ऊंची करोल टिब्बा की चढ़ाई से शुरू की जिसके बाद उसने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। करोल टिब्बा की चढ़ाई के बाद उसने नौ हजार फीट ऊंची कालीका टिब्बा, लद्दाख में स्थित एशिया के सबसे ऊंचे 20,187 फीट ऊंचे स्टॉक कांगड़ी तथा हिमाचल प्रदेश में अवस्थित दूसरे सबसे ऊंचे ट्रैकिग पीक 11,152 फीट ऊंचे खाटू पीक पर भी उसने तिरंगा फहराया।
निशु सिंह बताती है कि आने वाले दिनों में वह अफ्रीका में स्थित 5895 मीटर ऊंचे माउंट किलिमंजारो तथा यूरोप में स्थित 5642 मीटर ऊंचा माउंट एलब्रस की पहाड़ी की चढ़ाई करना चाहती है। साथ ही विश्व के सबसे ऊंचे माउंट एवरेस्ट को फतह करना लक्ष्य है। ऐसे में एक साधारण से परिवार में जन्मी निशु के आगे अपने लक्ष्य को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। साधारण परिवार होने के कारण पैसों की कमी दूर करना थोड़ा मुश्किल हो रहा है पर उसके परिवार के हौसले कम नहीं हैं।

नेशनललेवलपरकरतीहै_प्रतिनिधित्व

निशु ने बताया कि इसके बाद उसने इंडियन एडवेंचर्स फाउंडेशन की सहायता से देश के अलग-अलग राज्य में स्थित पहाड़ों की चोटियों पर चढ़ाई शुरू कर दी जिसके बाद उसका यह सफर शुरू हो गया। निशु बताती हैं कि बचपन से ही वह एथेलेटिक्स में काफी रूचि रखती है। उसने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य से नेशनल खेलों का प्रतिनिधित्व किया है। इसके अलावा राज्य स्तरीय और नेशनल प्रतियोगिता में सात स्वर्ण पदक उसने जीते हैं।

बैंक में गार्ड की नौकरी करते हैं पिता

निशु कहती हैं कि केंद्रीय विद्यालय तथा छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं में मैंने शॉटपुट और डिस्कस थ्रो का प्रतिनिधित्व किया है। निशु सिंह मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। उसके पिता सीआरपीएफ जवान थे जो रिटायर होने के बाद एक बैंक में गार्ड की नौकरी करते हैं। निशु बताती हैं कि उनके इस लक्ष्य और निर्णय को लेकर परिवार का हमेशा से सहयोग मिलता रहा है।

मां बोली : बेटी के सपनों के लिए जमीन भी कुर्बान

पिता जहां बेटी के हौसले पर गर्व महसूस करते हैं तो वही मां मुन्नी देवी कहती हैं कि अभी तक बेटी के इरादों का हमने समर्थन किया है और आने वाले समय में अगर पैसे की कमी इसके लक्ष्य के आड़े आती है तो हम कोई भी जतन कर उसके इस परेशानी को दूर करने का प्रयास करेंगे, चाहे हमें अपनी जमीन ही क्यों न बेचनी पड़े।

  • अनूप नारायण सिंह
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