लॉकडाउन में भी भ्रष्टाचारियों को जारी हो रहा समन, पुलिस ने अपनाया नायाब तरीका

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व्हाट्सएप नंबर पर जारी समन पर जैसे ही टीक ब्लू हुआ। सीबीआई उस समन को आरोपी द्वारा प्राप्त मान लिया जाता है। समन पर लिखी निर्धारित तारीख को आरोपी का स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में हाजिरी लगाना अनिवार्य है। समन देखने के बावजूद जब आरोपी मौन रहता है तो अदालत उसके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी वारंट तक जारी कर रही है। इस नई व्यवस्था से कोरोना का हवाला देकर बच रहे आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 

व्हाट्सएप नंबर पर भेजा गया समन 

केस नंबर 1. तत्कालीन प्रधान आयकर आयुक्त तापस कुमार दत्ता से जुड़े मामले में सीबीआई ने 15वां आरोपी सुबीर कुमार गांगुली को बनाया है। सीबीआई ने अगस्त महीने के पहले सप्ताह में पूरक चार्टशीट दाखिल की थी। अदालत के संज्ञान लेने के बाद आरोपी को समन किया गया। समन व्हाट्सएप नंबर पर भेजा गया, जिसे आरोपी ने देखा और पढ़ा भी। आरोपी को 31 अगस्त से पूर्व अदालत में हाजिरी लगानी थी, लेकिन नहीं पहुंचा। इसके बाद अदालत ने गैर जमानतीय वारंट जारी किया। 

केस नंबर 2. संजीवनी बिल्डकॉन से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में ईडी ने मई महीने में आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने मामले के सभी आरोपियों पर संज्ञान लिया। जिन आरोपियों के व्हाट्सएप नंबर थे, उसको उसी व्हाट्सएप नंबर पर समन भेज दिया गया। तीन पहुंचे और तीन नहीं पहुंचे। आरोपी प्रकाश प्रसाद लाला समेत तीन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। 

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